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Showing posts from July, 2009

स्टाइलिश रिलेटेड पोस्ट तस्वीर के साथ (You might also like widget)

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स्टाइलिश रिलेटेड पोस्ट विजेट लगाने के लिए यहां क्लिक करें हिन्दी ब्लॉग टिप्स पर आप हर पोस्ट के खत्म होने के तुरंत बाद तीन रिलेटेड पोस्ट देख रहे होंगे। You might also like शीर्षक के साथ आपको ये विजेट तीन पोस्ट की तस्वीर और हेडिंग दिखा रहा होगा। अगर आप हिन्दी ब्लॉग टिप्स के मुखपृष्ठ पर जाएंगे तो वहां मौजूद दस पोस्ट के सारांश के नीचे यह अलग-अलग रिलेटेड पोस्ट दिखाता मिलेगा। इस विजेट को लगाने के बाद से इस ब्लॉग के पिछले लेखों की विजिट अप्रत्याशित रूप से बढ़ी है और मैं आपको भी सलाह दूंगा कि इसे अपने ब्लॉग पर लगाएं।

इसे लगाना बहुत ही आसान है। यूं कहें कि चुटकियों का काम है। लिंकविदिन वेबसाइट के इस लिंक पर क्लिक करें। ई-मेल पता, ब्लॉग का पता, प्लेटफॉर्म (ब्लॉगर/वर्डप्रेस/अन्य) चुने और रंग संयोजन भी। इसके बाद Get Widget पर क्लिक कीजिए। अगले पेज पर आपको Install Widget लिखा मिलेगा। इस पर क्लिक करते ही यह आपके ब्लॉग तक पहुंच जाएगी। अगर आप बेहतर नतीजे चाहते हैं तो इसी पेज पर दिए गए निर्देशों का पूर्णतया पालन कर लीजिए।

स्टाइलिश रिलेटेड पोस्ट विजेट के फायदे

1. यह रेंडमली पोस्ट दिखाता है। यानी हर बार पेज…

क्या आप भी फेसबुक, ऑरकुट और ट्विटर पर मौजूद हैं ?

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यह पोस्ट आपको ऑरकुट और फेसबुक पर मौजूद दोस्तों के जन्मदिन गूगल कैलेंडर में जोड़ने का आसान सा तरीका सिखाएगी.. वैसे तो मैं सोशल नेटवर्किंग साइट्स को ज्यादा पसंद नहीं करता, क्योंकि इनमें अनचाहे लोग अनचाहे तरीके से आपको अनचाही बात कह देते हैं, लेकिन फ़िर भी मैं अच्छी सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर अपने प्रोफाइल मेंटेन करता हूं। कारण यह है कि इससे कई बार मेरा भूले बिसरे दोस्तों से मिलना हो जाता है, तो अक्सर कुछ अच्छे लोगों के साथ संपर्क का मौका भी मिलता है। साथ ही ब्लॉग पर भी कुछ विजिटर्स बढ़ते हैं। वैसे मैं इन पर मुश्किल से हफ्ते में आधा घंटा ही खर्च करता हूं।

इनका एक और फ़ायदा यह भी है कि इसमें दोस्तों के जन्मदिन का पूर्ण ब्योरा मौजूद रहता है और ये साइट्स उन्हें आसानी से विश करने में मदद करती हैं। पिछली पोस्ट में मैंने आपको गूगल कैलेंडर की जानकारी दी थी और वादा किया था कि आपको अपने गूगल कैलेंडर में एक क्लिक पर ऑरकुट और फेसबुक के दोस्तों के जन्मदिन जोड़ने की जानकारी दूंगा।

पेश है वह तरीका-

यहां क्लिक करें और ऑरकुट दोस्तों के जन्मदिन को सीधे अपने गूगल कैलेंडर में जोड़ें

यहा क्लिक करें औऱ फेसबुक दोस…

कितने काम का है गूगल कैलेंडर ?

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काफ़ी समय से प्रकाश बादल जी गूगल कैलेंडर के बारे में जानना चाह रहे थे और मैं आलसी उन्हें हर बार टालता जा रहा था। आज उन्होंने मुझे स्पष्ट शब्दों में कह ही दिया कि अगर मैंने इसके बारे में पोस्ट नहीं लिखी तो उनके मेरे संबंध भारत-चीन संबंधों की तरह "मधुर" हो जाएंगे। तो आज आपके सामने मैं गूगल कैलेंडर की खूबियां लिखने को मजबूर हूं। यकीन मानिए कि मैं अपनी इस मजबूरी से आपको पकाने नहीं जा रहा हूं। गूगल कैलेंडर वाकई बड़े काम की चीज़ है और हर ब्लॉगर को इसकी सुविधाओं के बारे में पता होना ही चाहिए।

बात शुरू करें उससे पहले गूगल कैलेंडर के फ़ायदे की एक बानगी देख लीजिए-

बी एस पाबला जी ने कई ब्लॉगर साथियों के जन्मदिनको गूगल कैलेंडर के रूप में एक जगह संजोया है। देखिए कितनी आसानी से हमें सभी के जन्मदिन की जानकारीइस कैलेंडर की मदद से हो रही है।

गूगल कैलेंडर के फायदे-

अब आते हैं मुद्दे की बात पर। सबसे पहले जानते हैं कि गूगल कैलेंडर की मदद से हम क्या क्या कर सकते हैं।

1. महीने, हफ्ते, दिन और घंटे के हिसाब से अपनी दिनचर्या के महत्वपूर्ण कार्यों को पहले से यहा फीड कर सकते हैं औऱ उसके बाद नियत समय पर उसक…

ब्लॉगर साथियो, अब भी वक्त है सुधर जाओ..

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मैं आज सुबह से डरा हुआ हूं। न तो सुबह की चाय ठीक से पी पाया हूं और न ही लंच ही ठीक से कर पाया हूं। काम में भी मन नहीं लग रहा है। ब्लॉग को तो खोलकर भी नहीं देखा है। वजह मत पूछिएगा। वरना आप भी डर जाएंगे। क्या कहा आप नहीं डरेंगे। बड़े बहादुर हैं। क्या आप मेरी तरह ब्लॉग एडिक्शन से पीड़ित नहीं हैं। देखिए चीन में इंटरनेट एडिक्शन किस तरह से छुड़वाया जा रहा है। आज के एक अखबार में छपा यह चित्र मेरे मन में दहशत फैला गया है, क्योंकि इस खास बीमारी के सारे लक्षण हम चिट्ठाकारों में भी है। कहीं यही तरीका हमें भी अपनाना पड़ा तो !!!!!!!!!!!!!

बड़ा देखने के लिए क्लिक करें (साभारः राजस्थान पत्रिका)





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जहां हम खड़े हो जाते हैं लाइन वहीं से शुरू होती है..

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एक साल 3 महीने और 1 हफ़्ते के दौरान हिन्दी ब्लॉग टिप्स पर करीब 185 पोस्ट लिखी गईं। इतना लिखने के बावूजद कुछ खास लाइनें ऐसी भी रहीं, जिन्हें मैं कभी नहीं लिख पाया। ये खास लाइनें थीं मेरे प्रोफाइल का About me (मेरे बारे में) वर्णन। अक्सर साथी पूछते थे कि मैंने अपने बारे में कुछ क्यों नहीं लिखा। दरअसल मुझे कभी सूझा ही नहीं कि मैं अपने बारे में क्या लिखूं, क्योंकि मेरे पास अपने बारे में कुछ लिखने को था ही नहीं। वैसे मेरे पास लिखने को अब भी नहीं है, लेकिन फिर भी आप आज इस वर्णन में कुछ लिखा देख रहे होंगे।


मैं आभारी हूं अनूप शुक्ल "फ़ुरसतिया" जी का, जिन्होंने अपनी चिट्ठाचर्चा में मेरे बारे में इतनी सम्मानजनक पंक्तियां लिखीं और मेरा प्रोफाइल पूरा करने में मदद की। आखिर हीरे की परख जौहरी ही जानता है :)


मैं आभारी हूं पचास से अधिक उन सभी साथियों का (अधिकतर ऐसे जो मेरे ब्लॉग पर पहली बार आए), जिन्होंने पिछली पोस्ट क्या टिप्पणी पाने के लिए खुद भी टिपियाना ज़रूरी है ??? पर अपने मूल्यवान विचार दिए और इस सार्थक मुद्दे के सभी पहलुओं को टटोलते हुए इसे अब तक की सबसे बड़ी बहस बनाया और एक निष्कर्ष…

क्या टिप्पणी पाने के लिए खुद भी टिपियाना ज़रूरी है ???

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आज शनिवार है तो सोचा कि क्यों न कुछ हल्की फुल्की बात की जाए। मन में विचार आया कि हिन्दी ब्लॉग टिप्स पर साथियों को ब्लॉगिंग के विषयों पर विचार-विमर्श का ऐसा मंच दिया जाए, जिस पर वे अपनी बात खुलकर कह सकें। सभी का स्वस्थ मनोरंजन भी हो और हिन्दी ब्लॉगिंग के कुछ अनछुए पहलुओं को भी टटोला जा सके।

आज के विचार-विमर्श का मुद्दा है-

क्या हिन्दी जगत में ब्लॉग पर टिप्पणी पाने के लिए खुद भी उनके ब्लॉग पर टिपियाना ज़रूरी है ???

इस मुद्दे पर आपकी राय सभी के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है, इसलिए कमेंट जरूर कीजिए। हो सकता है कि अगर यह बात स्थापित हो गई कि टिप्पणी के बदले ही टिप्पणी मिलती है तो मैं आपके ब्लॉग पर टिपियाने आ जाऊं :)

नोटः मिसाल के रूप में किसी ब्लॉग या ब्लॉगर विशेष का नाम लिया जाना वर्जित है। साथ ही बहस में अनाम (या छद्म नाम वाले) टिप्पणीकारों की टिप्पणियां भी शामिल नहीं होंगी।





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कितनी बार पढ़ी गई आपकी हर पोस्ट (per post hit counter)

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अपडेट (8 जुलाई 2009): पिछली स्क्रिप्ट लोड होने में वक्त ज्यादा लेती थी और कमेंट करने के बाद दिखाने वाले पेज की संख्या अलग दिखाती थी। इसलिए कोड बदलते हुए पोस्ट को अपडेट किया गया है। सहयोग के लिए धन्यवाद।
अगली पोस्ट में यह विजेट आसानी से साइडबार में लगाने का तरीका.. पिछले काफी दिनों से कुछ साथी यह सवाल पूछ रहे थे कि जिस तरह से ब्लॉग पर विजिटर्स की संख्या का पता हिट काउंटर लगाता है, क्या हर पोस्ट के लिए रीडर्स की अलग-अलग संख्या का पता चल सकता है। यह काम php स्क्रिप्ट की मदद से हो सकता है, लेकिन समय की कमी की वजह से मैं इसे तैयार करने से बचता रहा। आज सुबह दिल्ली के सॉफ्टवेयर इंजीनियर और तकनीकी ब्लॉग (अंग्रेजी) लेखक अमित जैन की ई-मेल मिली। उन्होंने बताया कि वे यह स्क्रिप्ट तैयार कर चुके हैं और इसे विजेट के रूप में हिन्दी ब्लॉगर साथियों को पेश करना चाहते हैं।
मुझे उनकी पेशकश अच्छी लगी और इस पर थोड़ा शोध करने के उपरांत मुझे पता चला कि अमित से पहले यह स्क्रिप्ट काफी सरल रूप में अनुज पठानिया तैयार कर चुके हैं। इसके बाद मैंने पठानिया की अपलोड की गई स्क्रिप्ट को इस्तेमाल किया और पूरे एक दिन इसे आज…

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